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C. Kumar N. Patel Biography in Hindi – सी. कुमार एन. पटेल 2022

C. Kumar N. Patel Biography in Hindi:- सी . के . एन . पटेल में 1960 में लेसर के रूप में एक क्रांतिकारी आविष्कार सामने आया , जो तीक्ष्ण व शुद्ध किरणों का उत्पादन कर सकता था । इसमें विकिरण द्वारा प्रेरित होकर निस्सारण से उत्पन्न होने वाले प्रकाश का संर्वधन होता है ।

इस विधि में परमाणु बिजली से प्राप्त ऊर्जा को बल्ब के फिलामेंट प्रकाश के रूप में छोड़ता जाता है । यद्यपि लेसर का यह रूप अधिक उपयोगी व शक्तिशाली नहीं था । ऐसे में भारत के वैज्ञानिक सी . के . एन . पटेल ने कार्बन डाइऑक्साइड लेसर का आविष्कार करके लेसर को अधिक शक्तिशाली बना दिया और उसका जीवन की कई शाखाओं में उपयोग किया जाने लगा । मूल रूप से वह एक इंजीनियर थे , जिन्होंने भौतिकी के क्षेत्र में विशेष उपलब्धियां हासिल कीं ।

C. Kumar N. Patel Biography in Hindi- परिचय

कार्बन डाईऑक्साइड लेसर जैसे क्रांतिकारी आविष्कार करने वाले पटेल का पूरा नाम चंद्र कुमार नरानभाई पटेल है । उनका जन्म 2 जुलाई 1938 को पुणे के बारामती नगर में हुआ । उनके पिता का नाम नरेनभाई पटेल था । बचपन से ही उन्हें किसी भी चीज की बनावट व आंतरिक सरंचना को जानने की जिज्ञासा रहती थी ।

वह घर की चीजों को खोल कर उनका अध्ययन करते और उन्हें यथावत जोड़ भी देतें थें । इसी वजह से इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनकी रुचि का विकास होता गया । शिक्षा व अध्ययन चीजों की बनावट के प्रति जिज्ञासा रखने के कारण वह विज्ञान के कार्यों में भी सरलता से निपुण होते चले गए ।

वह अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान सदा उच्च अंकों सहित उत्तीर्ण होते रहे । स्कूली शिक्षा पूरा करने के पश्चात उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया और वहां से गहन अध्ययन कर 1958 में दूरसंचार में इंजीनियरिंग स्नातक अर्थात बी . ई . की उपाधि प्राप्त की । बी . ई . में वह सर्वाधिक अंकों से पास हुए थे और इसीलिए उन्हें विश्वविद्यालय द्वारा ‘ वी . आर . बस्तीकर पुरस्कार ‘ प्रदान किया गया ।

C. Kumar N. Patel Biography in Hindi

इंजीनियरिंग की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वह मात्र 23 वर्ष की आयु में अमेरिका चले गए । वहां उन्होंने विद्युत इंजीनियरिंग का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया । 1959 में उन्होंने स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय से एम . एस . की उपाधि प्राप्त की ।

तत्पश्चात 1961 में गहन शोध व अनुसंधान कर उन्होंने स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय से ही पी – एच . डी . की डिग्री प्राप्त की । प्रशिक्षित और प्रतिभाशाली होने के कारण पी – एच . डी . के कुछ समय उपरांत ही उन्हें अमेरिका की प्रसिद्ध बेल प्रयोगशाला में नौकरी मिल गई ।

इसके बाद वह अति गंभीरता से अपने वैज्ञानिक कार्यों में शोध करने लगे । उन्होंने लेसर विकिरण से निकलने वाले गैसीय उत्सर्जन में लेसर प्रक्रिया पर गहन शोध कार्य किया । गैस के लेसर में गैस या गैसों के अणु या परमाणुओं को लेसर प्रकाश देने के लिए प्रेरित किया जाता है ।

C. Kumar N. Patel Biography in Hindi

सम्मान व पुरस्कार

बेल प्रयोगशाला में उल्लेखनीय शोध कार्यों के कारण उन्हें वेलेंटाइन पदक , लैमे पदक तथा ज्वोरिकिन पदक भी प्रदान किए गए । 1966 में ऑप्टिकल सोसायटी ऑफ अमेरिका ने उनके योगदान के लिए उन्हें एडोल्फ लॉम्ब पदक प्रदान कर सम्मानित किया ।

फेलोशिप व सदस्यता नरेनभाई पटेल की उपलब्धियों के प्रसार के लिए अमेरिका की अमेरिकन फिजिकल सोसायटी ने उन्हें अपना फेलो मनोनीत किया । साथ ही वह इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर्स , तथा सिग्मा ग्यारह जैसी वैज्ञानिक संस्थाओं के सदस्य भी बनें ।

कार्बन डाइऑक्साइड लेजर का उपयोग

आज उनके द्वारा आविष्कृत लेजर का उपयोग कई उद्योगों में कई महत्वपूर्ण कार्यों में किया जाता है। वर्तमान में उनके द्वारा खोजे गए कार्बन डाइऑक्साइड लेजर को और भी शक्तिशाली बना दिया गया है।

कार्बन डाइऑक्साइड लेजर धातुओं को छेदने, धातुओं को काटने और जोड़ने में मदद करते हैं। इन लेज़रों का उपयोग शल्य चिकित्सा में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। वर्तमान में, CO2 लेजर में सबसे अधिक लेजर उपचार होता है।

यह प्रयोग त्वचा को चिकना बनाता है क्योंकि लेजर निचले डर्मिस में उपलब्ध कोलेजन बैंड को कम करने में मदद करता है।

यह नाक पर झुर्रियों, निशान और बढ़े हुए तेल ग्रंथियों की उपस्थिति को भी कम करता है। आने वाले समय में इसका इस्तेमाल स्किन कैंसर के इलाज में किया जा सकता है।

Manshu Sinhahttp:////reviewhindi.in
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