Satyendra Nath Bose Biography in Hindi -सत्येंद्रनाथ बोस 2022

Satyendra Nath Bose Biography in Hindi :- सत्येंद्रनाथ बोस ” मनुष्य कर्म और परिश्रम से ही महान बनता है , उसे कर्म करने के लिए परिश्रम की आवश्यकता होती है … ” ” स्वयं की संतुष्टि और सहमति से बढ़ कर दूसरे की संतुष्टि श्रेष्ठ होती है । ”

इन विचारों को व्यावहारिक जीवन में अपनाने वाले महान वैज्ञानिक सत्येंद्रनाथ बोस थे , जिनकी वैज्ञानिक प्रतिभा ने विश्व के महानतम वैज्ञानिक आइंस्टान को भी बहुत प्रभावित किया था । इसलिए आइंस्टान ने उनके साथ काम करके नया सिद्धांत भी विकसित किया ।

Satyendra Nath Bose Biography in Hindi

विज्ञान और संगीत से समान रूप से लगाव रखने वाले इस वैज्ञानिक का जन्म 1 जनवरी 1894 को कोलकाता में हुआ । उनके पिता का नाम सुरेंद्रनाथ बोस था । अपनी प्रखर बुद्धि के कारण जहां वह अध्यापकों के प्रिय छात्र थे , वहीं दूसरे छात्र इसी कारण से उनसे ईर्ष्या करते थे ।

ADVERTISEMENT विज्ञापन

उनके पास अध्यापकों के हर सवाल का जवाब तैयार रहता था । वह कक्षा में हमेशा प्रथम स्थान पर ही आते थे । शिक्षा , अध्ययन व कैरियर डॉ . सत्येंद्रनाथ बोस ने प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता के एक स्कूल में प्राप्त की । कोलकाता विश्वविद्यालय से ही उन्होंने 1913 में बी . एस . सी . तथा 1915 में एम . एस . सी . की परीक्षा पास की , जिसमें उन्हें प्रथम स्थान प्राप्त हुआ ।

इस समय वह मात्र 21 वर्ष के थे । बाद में जादवपुर विश्वविद्यालय से उन्होंने डी . एस . सी . की उपाधि प्राप्त की । उन्होंने विज्ञान के साथ – साथ जर्मन भाषा में भी दक्षता हासिल कर ली थी । इस भाषा का उन्होंने विज्ञान कार्यों में भी सदुपयोग किया ।

ADVERTISEMENT विज्ञापन

Satyendra Nath Bose Biography in Hindi

उन्होंने 1920 में आइंस्टाइन के सापेक्षता सिद्धांतों संबंधी शोधपत्रों का जर्मन भाषा में अध्ययन किया । जनसामान्य लोगों के लिए उन्होंने इन लेखों का जर्मन भाषा से अंग्रेजी भाषा में भी अनुवाद किया । शिक्षा प्रगति व अध्ययन के पश्चात उन्होंने 1916-21 तक कोलकाता में लेक्चरर के रूप में कार्य किया ।

1921 से 1924 तक वह ढ़ाका विश्वविद्यालय में भौतिकी पढ़ाते रहे । ढ़ाका में पढ़ाते समय ही उन्होंने भौतिक शास्त्र के लेखों के संकलन वाली एक पुस्तक ‘ थर्मोडाय नेमिक्स एंड वार्मस्टर हलंग ‘ का गहन अध्ययन किया । इससे उन्हें गणितीय फार्मूलों व समीकरणों को हल करने में काफी सहायता मिली । उन्होंने अपने शोध कार्यों में भी इसकी मदद ली ।

ADVERTISEMENT विज्ञापन

वह 1924 में उच्च अध्ययन के लिए यूरोप चले गए और वहां उन्होंने काफी शोध कार्य किए । उनकी इच्छा वहां स्थित ‘ मैडम क्यूरी अनुसंधानशाला ‘ में जाकर अध्ययन कार्य करने की थी । यद्यपि शुरूआती प्रयासों में उन्हें वहां नियुक्ति नहीं मिलीं किंतु बाद में उन्हें वहां सहायक का पद प्राप्त हो गया । यह उनके लिए एक अच्छा अवसर था और उन्होंने इस अवसर का भरपूर फायदा उठाया ।

Satyendra Nath Bose Biography in Hindi

उन्होंने वहां कई नए प्रयोग किए । उनके शोध कार्यों ने वहां के प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित किया । बोस – आइंस्टाइन स्टैटिस्टिक्स का जन्म इसी दौरान उन्होंने एक अद्भुत लेख लिखा ‘ प्लांक्स लॉ एंड लाइट क्वांटम्स हाइपोथीसिस ‘ शीर्षक वाले इस लेख को किसी भी भारतीय व विदेशी पत्रिका ने प्रकाशित नहीं किया । अनायास ही आइंस्टाइन ने उस लेख को पढ़ा तो वह उस से अति प्रभावित हुए ।

उन्होंने उस लेख का जर्मन भाषा में अनुवाद किया और उसे ‘ आगे की ओर एक महत्वपूर्ण कदम ‘ शीर्षक दिया । इस लेख को जर्मन पत्रिका ‘ जाइटशिरफ्ट ‘ फ्यूर फिजिक्स ‘ ने तुरंत प्रकाशित कर दिया । आइंस्टाइन , बोस के शोध लेख से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने बोस को अपने साथ काम करने के लिए प्रस्ताव भेजा , जिसे बोस ने स्वीकार कर लिया ।

आइंस्टाइन व बोस ने मिल कर 1925 से 1926 तक काम किया और 1924-25 में ‘ बोस आइंस्टाइन स्टैटिस्टिक्स ‘ नामक सिद्धांत का जन्म हुआ । यह सिद्धांत विद्युत चुंबकीय विकिरण के गैसीय गुणों से संबंधित था । इसमें मूल तत्व के कण जैसे कि अल्फा कण तथा फोटोन्स कण , जो बोस सांख्यिकी सिद्धांत को मानते है , उन्हें बोसोन्स का नाम दिया गया ।

Satyendra Nath Bose Biography in Hindi

थर्मोल्यूमिनेसेंस तथा यूनिफाइड फील्ड थ्योरी में योगदान इस सिद्धांत से बोस विज्ञान का ही एक भाग बन गए । इस उपलब्धिपूर्ण प्रयास के साथ – साथ बोस ने स्टेटिस्टिकल मैकेनिक्स , आयनमंडल की विद्युत चुंबकीय विशेषताओं , एक्स – रे क्रिस्टलोग्राफी के सिद्धांतों तथा ऊष्मा गतिकी पर भी शोध कार्य किया ।

उन्होंने थर्मोल्यूमिनेसेंस तथा यूनिफाइड फील्ड थ्योरी में भी अपना योगदान दिया । बोस के प्रयासों की आइंस्टाइन ने वैज्ञानिक जगत में प्रशंसा की और उन्हें एक प्रमाण पत्र भी दिया । कुछ समय यूरोप में बिताने के दौरान ही उन्होंने गुरुत्वाकर्षण एवं विद्युतीय चुंबक पर अधिक उच्च कार्य प्रारंभ किया । विज्ञान के प्रति उनकी सेवा व शोध के कारण ही 1940 में उन्हें लंदन की रॉयल सोसायटी की सदस्यता मिल गई ।

Satyendra Nath Bose Biography in Hindi

1926 में उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय में दोबारा प्रोफेसर के पद पर कार्य करना प्रारंभ कर दिया और 1945 तक इसी पद पर बने रहें । 1945 में उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में अध्यापन व अध्ययन करना प्रारंभ कर दिया और 1956 तक इसी विश्वविद्यालय से जुड़े रहे । वह 1956-58 तक विश्व भारती विश्वविद्यालय के उपकुलपति भी बने रहे और 1958 से 1974 तक नेशनल प्रोफेसर के रूप में कार्य करते रहे ।

संस्थाओं की सदस्यता व सम्मान • 1940 में रॉयल सोसायटी की सदस्यता के अलावा वह कई अन्य संस्थाओं के सदस्य भी रहें । अपने बंगाल प्रवास के दौरान उन्होंने बंगीय बीजानन परिषद की स्थापना भी की और वहां से निकलने वाली एक बंगला पत्रिका ‘ ज्ञान और विज्ञान ‘ का संपादन भी किया । 1943 से 1944 में वह इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे । 1948 से 50 के बीच उन्होंने ” मैसूर इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस ” के अध्यक्ष पद पर कार्य किया ।

पद्मभूषण सम्मान भारत सरकार द्वारा 1954 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान देकर सम्मानित किया गया । 1958 में लंदन स्थित रॉयल सोसायटी ने उन्हें अपना फेलो बनाया । वह राज्यसभा में संसद सदस्य रहे । उन्हें इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी का सदस्य भी चुना गया ।

उन्होंने कई लेख व शोध पत्र भी लिखे । सत्येंद्रनाथ बोस को मेघनाथ मेमोरियल स्वर्ण पदक तथा पद्मभूषण सम्मान प्रदान किया गया । भारत व विदेशों के कई विश्वविद्यालयों ने उन्हें डी . एस . सी . की मानद उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया । उनका देहांत 80 वर्ष की आयु में 4 फरवरी 1974 को कोलकाता में हुआ ।