Insulin ki khoj kisne ki और कब की?

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे इस नए लेख में आज हम आपको बताएंगे कि आखिर Insulin ki khoj kisne ki और कब की? दोस्तों अगर आप नहीं जानते हैं कि Insulin ki khoj kisne ki और कब की? तो कृपया यह लेख पूरा पढ़ें।

आइए जानते हैं Insulin ki khoj kisne ki और कब की? आपने इंसुलिन के बारे में यह जानकारी भी रखी होगी कि इंसुलिन का संबंध मधुमेह से है, लेकिन क्या आप जानते हैं किInsulin ki khoj kisne ki और कब की?

Insulin क्या है? (Insulin ki khoj kisne ki)

दोस्तों इस बढ़ती उम्र में बीमारियां भी बढ़ती जा रही हैं, लेकिन समस्या यह है कि हम बहुत कम बीमारियों के बारे में जानते हैं और उनके लिए दवा या इलाज भी कम उपलब्ध है। इन्हीं में से एक का नाम है डायबिटीज, इसका नाम तो आपने सुना ही होगा और आपको यह भी पता होगा कि डायबिटीज क्यों होती है, अगर आप नहीं जानते तो बता दें कि डायबिटीज ज्यादा चीनी या मिठाई खाने से होती है।

मधुमेह एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है अगर यह अंतिम चरण में पहुंच जाती है, लेकिन हां इसका इलाज भी उपलब्ध है लेकिन यह उपचार अंतिम चरण के लोगों के लिए ज्यादा काम नहीं करता है। अगर हम इसकी दवा की बात करें तो इसे इंसुलिन कहते हैं। वैसे तो इंसुलिन हमारे शरीर में मौजूद होता है लेकिन जब लोग ज्यादा मीठा खाने लगते हैं तो हमारे शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम हो जाती है।

इंसुलिन अग्न्याशय द्वारा निर्मित एक आवश्यक हार्मोन है। इसकी मुख्य भूमिका हमारे शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करना है। इंसुलिन हार्मोन के संतुलन से हमारा शरीर सक्रिय रहता है। हमारे शरीर को ऊर्जावान बनाने के लिए शुगर (चीनी) की जरूरत होती है, लेकिन शुगर सीधे हमारे अंगों तक नहीं पहुंच पाती है, इसलिए हमें इंसुलिन हार्मोन की जरूरत होती है।

जब हम खाना खाते हैं, तो बीटा सेल हमारे अग्न्याशय को इंसुलिन छोड़ने का संकेत देता है ताकि हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन से चीनी को निकाला जा सके और शरीर के अन्य भागों में पहुँचाया जा सके। लेकिन जब हमारे शरीर में बीटा सेल्स डैमेज हो जाते हैं तो पैंक्रियाज को सिग्नल नहीं मिल पाता जिसके कारण अग्न्याशय इंसुलिन नहीं छोड़ता। और हमारे द्वारा खाया गया भोजन कभी भी शरीर के अन्य अंगों तक नहीं पहुंचता है, जिससे शरीर के अंग खराब होने लगते हैं और इससे मधुमेह की बीमारी हो जाती है।

मधुमेह की बीमारी को रोकने के लिए शरीर को इंसुलिन के इंजेक्शन दिए जाते हैं ताकि इंसुलिन शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंच सके और यह इंसुलिन इंजेक्शन शरीर में लगभग 1 घंटे तक काम करता है, यह अलग-अलग इंजेक्शन पर निर्भर करता है कि कौन से इंजेक्शन कितने काम करता है।

Insulin ki khoj kisne ki और कब की? (Insulin ki khoj kisne ki)

Insulin की खोज कनाडा के चिकित्सा वैज्ञानिक Frederick Banting (फ्रेडरिक बैंटिंग) ने 1921 में की थी। फ्रेडरिक ग्रांट बैंटिंग और उनके साथी जे.जे.आर मैकलियोड को इंसुलिन की खोज के लिए 1923 में चिकित्सा विज्ञान में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

Insulin की खोज का इतिहास (Insulin ki khoj kisne ki)

1921 से पहले जिस किसी को भी मधुमेह था, वह सीधे डॉक्टर के पास जाता था, लेकिन मधुमेह की बीमारी को देखकर कोई भी यह पता नहीं लगा पाता कि यह रोग किस कारण से और शरीर के किस अंग से होता है। इसके बाद सन् 1775 में Matthew Dobson (मैथ्यू डोबसन) नाम के एक व्यक्ति ने पाया कि मधुमेह के रोगियों का मूत्र न केवल मीठा होता है बल्कि उनके रक्त में शर्करा भी पाई जाती है और यह निर्णय लिया गया है कि मधुमेह गुर्दे की बीमारी नहीं है बल्कि यह शरीर का उपापचय और पाचन तंत्र भी इससे संबंधित है।

1889 में, ऑस्कर मिंस्की और जोसेफ वैन मेरिंग नाम के वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि क्या एक कुत्ता अग्न्याशय के बिना रह सकता है। फिर उसने एक कुत्ते के अग्न्याशय को हटा दिया, कुत्ता जीवित रह गया लेकिन उस कुत्ते में मधुमेह के लक्षण दिखने लगे थे और उस कुत्ते का शरीर वसा और प्रोटीन को भी पचा नहीं पा रहा था, इसे देखकर तय किया गया था डायबिटीज का इलाज अग्न्याशय में ही छिपा है।

1901 में, Eugene Lindsay Opie (युजिन लिंडसे ओपी) नाम के एक व्यक्ति ने पाया कि मधुमेह के रोगियों के अग्न्याशय के आइलेट ऑफ लैंगरहैंस (इंसुलिन) की कोशिकाएं मधुमेह के बाद परिवर्तन से गुजरती हैं। इसे पहचानते हुए डॉ. जॉर्ज लुडविक जूलजर ने वर्ष 1908 में अग्न्याशय की दवा तैयार की और मधुमेह के 8 रोगियों पर इस दवा को आजमाया और देखा कि मधुमेह में कुछ सुधार हुआ है लेकिन इसके कुछ दुष्प्रभाव भी हुए, जिसके कारण उस दवा को लेना पड़ा।

इसके बाद इंसुलिन बनाने की जिम्मेदारी फ्रेडरिक ग्रांट बैंटिंग और हर्बर्ट बेस्ट को दी गई, जिसके बाद कई दवाएं बनाई गईं लेकिन उनके साइड इफेक्ट भी हुए। फिर और अधिक शोध करने के बाद इंसुलिन बनाया गया और 1922 में कुछ मधुमेह रोगियों पर इस इंसुलिन का परीक्षण किया गया, तब पता चला कि मधुमेह की बीमारी धीरे-धीरे ठीक हो रही है।

Insulin की खोज कब हुई थी?

Insulin की खोज सन 1921 में हुई थी।

Insulin क्या है?

Insulin अग्न्याशय द्वारा निर्मित एक आवश्यक हार्मोन है। इसकी मुख्य भूमिका हमारे शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करना है।

Insulin की खोज किसने की थी?

इन्सुलिन की खोज Frederick Banting (फ्रेडरिक बैंटिंग) ने की थी।

आज आपने क्या सीखा?

तो दोस्तों आज कि इस लेख में हमने आपको बताया कि आखिर Insulin ki khoj kisne ki और कब की? दोस्तों अगर आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आती है तो कृपया इसे अन्य लोगों तक भी शेयर करें ताकि वे भी जन सकें कि Insulin ki khoj kisne ki और कब की?

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