रोबोट का आविष्कार किसने किया था?

नमस्कार दोस्तों स्वागत हैं आपका हमारे इस नए आर्टिकल में आज हम आपको बताने वाले है कि आखिर रोबोट का आविष्कार किसने किया था? दोस्तों आज हम जिस जमाने में जी रहे हैं वहाँ रोबोट जैसा शब्द कोई आश्चर्यजनक नहीं हैं। मनुष्य के जीवन के कई ऐसे पहलूँ हैं जिसमे रोबोट उसकी मदद कर सकता हैं परंतु किन्ही विपरीत कारणों के चालते आजकल के वैज्ञानिक इन्हे ज्यादा दर्ज नहीं देते है।  

आज हम आपको रोबोट के बारे में पूरा इतिहास बताएंगे तथा यह भी बताएंगे कि इसकि खोज व अविष्कार या अवधारणा कहाँ से प्रारंभ हुई? 

रोबोट क्या है? 

रोबोट यानी मशीनी मानव निस्संदेह मानव के लिए विज्ञान की एक अनूठी खोज है। हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के संगम से निर्मित इस मानव की उपयोगिता मनुष्य की पहुंच से परे कठिन, खतरनाक और घातक क्षेत्रों में अतुलनीय है। आज रोबोट का इस्तेमाल कई तरह के कामों के लिए किया जा रहा है। इनमें से कई कार्यों में इसकी प्रभावी उत्पादकता को देखते हुए आविष्कृत रोबोट निर्माण की नवीनतम तकनीक को रोबोटिक्स नाम दिया गया है। आज दुनिया के कई विकसित और विकासशील देश जैसे ब्रिटेन, अमेरिका, भारत, जापान और कोरिया रोबोटिक्स पर बहुत गंभीरता से काम कर रहे हैं।

ये आविष्कृत रोबोट सफलतापूर्वक कई कार्य कर सकते हैं; जैसे घरेलू काम, सुरक्षा कार्य, खेल पढ़ाना और साथ में खेलना, ट्रकों में सामान लादना और उतारना, ग्राहकों को सेवा प्रदान करना, दूरस्थ अंतरिक्ष मिशनों में काम करना, यांत्रिक उत्पादों का निर्माण, मशीनों में पुर्जों को लगाना और हटाना उच्च तापमान वाले कारखानों में काम करना और रेडियोधर्मी प्रदूषण, रोबोटिक सर्जरी, परमाणु स्टेशनों की सफाई, ज्वालामुखी लावा क्षेत्रों में काम और आपदा प्रबंधन कार्य, कोयले और सोने की खानों में काम, उच्च तापमान और रेडियोधर्मी प्रदूषण वाले कारखाने जहरीले रसायनों के निर्माण में काम करते हैं,

औद्योगिक कारखानों में गर्म हटाने के लिए काम करते हैं गर्म भट्टियों के तत्व और उनसे उत्पाद बनाते हैं, कारों, ट्रकों, वाहनों आदि की पेंटिंग और उन्हें जगह-जगह वेल्डिंग करते हैं, घातक गैस, रात और दिन उच्च ऊंचाई और गहरी जगह पर काम करते हैं और सर्जरी, अंग प्रत्यारोपण, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, ईसीजी आदि तकनीकी कार्य।

रोबोट का आविष्कार किसने किया था?

दुनिया का पहला रोबोट अमेरिका की कंपनी ‘स्पेरी गायरो स्कोप’ ने साल 1923 ई. में बनाया था, उस रोबोट का नाम जॉर्ज था. 1939 ई. में जब न्यूयॉर्क में विश्व मेले का आयोजन किया गया, तो परिष्कृत रोबोट इलेक्ट्रो की एक प्रदर्शनी लगाई गई थी। वह रोबोट मोटर्स की मदद से चल भी सकता था।

रोबोट के अविष्कार का इतिहास? 

अमेरिका की एक कंपनी ने साल 1962 में एक औद्योगिक रोबोट का निर्माण किया था। 1980 तक ऐसे रोबोट बन चुके थे, जो इंसानों की तरह कारखानों में वेल्डिंग, नट-बोल्ट खोलने और कसने आदि का काम करने लगे थे। आधुनिक विज्ञान प्रौद्योगिकी ने अब माइक्रोप्रोसेस तकनीक का उपयोग करके मानव जैसे रोबोट का आविष्कार किया है। यह रोबोट इंसान की तरह काम करता है। इसके शरीर में मांस और हड्डियों के स्थान पर स्टील या प्लास्टिक का उपयोग किया गया है, धमनियों और नसों के स्थान पर तार लगाए गए हैं, जिसमें रक्त के बजाय विद्युत प्रवाह होता है।

रोबोट माइक्रोप्रोसेसर की मदद से बोलते हैं, कैमरे की मदद से देखते हैं और संवेदी उपकरणों की मदद से स्पर्श करते हैं। रोबोट को संचालित करने वाले कंप्यूटर को रोबोट के अंदर या बाहर रखा जा सकता है। आज वैज्ञानिक ऐसे रोबोट का आविष्कार करने में लगे हुए हैं, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विकास किया जा सके। ऐसा रोबोट बिना थके एक ही कार्य को अनिश्चित काल तक करता रह सकता है, फिर भी उसकी कार्यक्षमता और दक्षता प्रभावित नहीं होती है। कार्य का क्रम और उसकी गतिविधियों के कार्यक्रम रोबोट के माइक्रो कंप्यूटर में संग्रहीत होते हैं। रोबोट एक ही प्रोग्राम के अनुसार काम करते हैं, उससे ज्यादा या कम नहीं।

मनुष्य ने अब तक जिन रोबोटों का आविष्कार किया है, उनका मस्तिष्क ‘पांच सौ न्यूरॉन्स’ की क्षमता से लैस है, जबकि मानव मस्तिष्क दस हजार मिलियन से अधिक न्यूरॉन्स और एक लाख से अधिक सहायक कोशिकाओं से बना है। हालांकि मानव मस्तिष्क की संरचना बहुत जटिल और संवेदनशील है, इसे तैयार करना और इसे रोबोट में विकसित करना असंभव लगता है, लेकिन इस दिशा में भी वैज्ञानिक कदम उठाए गए हैं। लंदन के प्रोफेसर वारविक और उनकी युवा वैज्ञानिकों की टीम ने एक मशीन को इंसान यानी रोबोट बनाने की दिशा में काम शुरू किया। उन्होंने सेवन ड्वार्फ्स नामक एक तिपहिया वाहन का निर्माण किया। 

इस वाहन द्वारा विभिन्न कार्य किए गए। इसमें कुछ बौने रोबोट ऐसे सर्किट में बैठे थे, जिसके आधार पर वे इंसानों की तरह चलते हैं, अपनी बैटरी खुद चार्ज करते हैं और एक समूह की तरह मिलकर काम करते हैं। प्रोफेसर वारविक को विश्वास है कि आने वाले समय में वे मानव मस्तिष्क के योग्य मशीनी मस्तिष्क बनाने में अवश्य ही सफल होंगे।

अमेरिका द्वारा विकसित एक्सप्लोरर, पाथफाइंडर, स्पिरिट और रोवर जैसे रोबोटों को मंगल ग्रह पर जीवन की खोज के लिए इस्तेमाल करने के लिए भेजा गया था। नासा द्वारा अन्य ग्रहों पर भी रोबोटिक मशीनें भेजी गईं। ये रोबोटिक मशीनें अपनी क्षमता से अधिक और निर्धारित अवधि से अधिक समय से सफलतापूर्वक काम कर रही हैं।

आज दुनिया भर के वैज्ञानिक ऐसे रोबोट का आविष्कार करने में लगे हुए हैं, जिनमें इंसानों की तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को स्थापित किया जा सकता है। एलन टर्निंग नामक वैज्ञानिक ने कृत्रिम बुद्धि को मापने की एक विधि का आविष्कार किया है, जिसे ‘टर्निंग टेस्ट’ नाम दिया गया है।

आज आपने क्या सीखा?

तो दोस्तों आज हमने आपको यह बताया कि आखिर रोबोट का अविष्कार किसने किया तथा इसका इतिहास क्या है? अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगता है तो कृपया इसे शेयर करें । 

Manshu Sinha

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